सार्वजनिक स्थान, सरकारी कार्यालय, सरकारी स्कूल हो या सुनसान इलाके में कोई निजी प्रॉपर्टी पर उपलब्ध सुविधा, असामाजिक तत्वों को ये सब उनके बाप की प्रॉपर्टी नजर आती है।
इनमें से जो निकल सकता है वो निकालने की कोशिश करते हैं और जो न निकले उसे बर्बाद कर देते हैं।
कई साल पहले की बात है हमारे जोगिया बस्ती स्थित सरकारी स्कूल में कंप्यूटर लैब लगी थी पूरी सुविधाएं थी सौर ऊर्जा आदि भी साथ में थी और छात्रों के लिए कंप्यूटर। जिस दिन लगे उसी रात वो चोरी हो गए, पुलिस को क्या मिला क्या नहीं उसके बाद इसकी कोई खबर नहीं सुनी।
लिखने वाले ने क्या खूब लिखा है
मलकीसर बड़ा की भूख ने गेट भी नहीं छोड़ा, और अब गेट ले जाने वाले करोड़पती हैं।
