लूणकरणसर की जनता के कर्मा में कांकरा ही लिखेड़ा है।

Kalu Nath Gour
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एक महीने पहले #लूणकरणसर जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर श्रीमती दिव्याश्री चौधरी जी यहां आईं और अब चली भी गई।




पिछले 1 साल में ये दूसरी महिला डॉक्टर है जो यहां आकर वापिस चली गई हैं, क्या कारण रहा होगा?

21 फरवरी 2026 को उनके द्वारा "लूणकरणसर की पहली सिजेरियन डिलीवरी करवाई गई थी" मुझे इस खबर के अंदर इस अपडेट के अंदर ढिंढोरा पीटने वाली कोई बात नजर नहीं आई थी लेकिन मुझे दिखा था इसके अंदर हमारी जनता की हर मामले में चुप रहने की आदत कितनी उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

 हमारी जनता बीकानेर जाना मुनासिब समझती हैं लेकिन यहां हमारे अस्पताल में महिला डॉक्टर की मांग नहीं कर सकते, मेरे दोनों बच्चे सिजेरियन डिलीवरी से हुए हैं और दोनों बीकानेर के अलग अलग अस्पतालों में पहला प्राइवेट और दूसरा पीबीएम में, वहां जाकर डिलीवरी करवाना, इलाज करवाना कितना कष्टदाई और मानसिक तौर पर परेशान कर देता है, प्रसूति के लिए भी और उनके साथ गए घरवालों को भी।

जैसा कि मैं पिछली अपनी पोस्ट में भी बताया था की लूणकरणसर से बेहतर तो प्रसूतियों के लिए कालू अस्पताल बेहतर माना जाता है।

• महिला डॉक्टर आखिर क्यों टिक नहीं पातीं?
• क्या यहां ऑपरेशन थिएटर, स्टाफ या उपकरणों की कमी है?
• क्या प्रशासन की तरफ से सहयोग नहीं मिलता?
• क्या सुरक्षा या रहने की व्यवस्था में समस्या है?
• कितनी प्रसूतियां हर महीने बीकानेर रेफर की जाती हैं?
• कितनी सिजेरियन डिलीवरी बाहर करवानी पड़ती हैं? करवानी पड़ती है क्योंकि वहां सुविधा तो मिलेगी लेकिन जेब खाली होती देर नहीं लगेगी.. लाखों रुपए देने होते तब जाकर मां बेटा/बेटी घर आ पाते हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि हर महीने दर्जनों गर्भवती महिलाओं को बीकानेर रेफर किया जाता है…

और रात में 70–80 किमी का सफर कितना जोखिम भरा होता है, बीकानेर जिले में बढ़ते सड़क हादसों से आप अपरिचित नहीं हैं। एम्बुलेंस मिलने में देरी या दिन में अस्पताल से लेकर सागर होटल तक बेतरतीब तरीके से खड़े ट्रैक्टर ट्रालियों, पिकपों और ट्रकों की वजह से लगे सड़क पर जाम की वजह से एंबुलेंस को निकलने में देरी। क्या क्या कमी बताऊं, आप हर समस्या पर आंखे मूंद सकते हैं मैं नहीं...

हम सबको मिलकर ज्ञापन देना चाहिए की अस्पताल में स्थायी महिला डॉक्टर की नियुक्ति की जाए और केवल नियुक्ति की मांग से काम नहीं चलेगा उनके रहने की व्यवस्था भी में कमी होना भी उनका बार बार लूणकरणसर छोड़कर जाना एक वजह हो सकती है। युवा नेताओं से मैं उम्मीद भी नहीं करता लेकिन जनप्रतिनिधियों से खुली बैठक की मांग करनी चाहिए। पर आप सोशल मीडिया पर शांत रहने की बजाय सामूहिक आवाज तो उठा ही सकते हो।

पहली सिजेरियन डिलीवरी होना गर्व की बात नहीं, बल्कि यह सवाल है कि इतने वर्षों बाद पहली क्यों? इससे पहले क्यों नहीं हो सकती थी, और क्यों नहीं इसके लिए ऐसा सिस्टम तैयार किया गया?
जब तक हमारी, आपकी चुप्पी जारी रहेगी, तब तक हमारी माताएं सफर में दर्द झेलती रहेंगी।

अगर पास के कस्बे का अस्पताल प्रसूतियों के लिए बेहतर माना जा रहा है,
तो यह हमारे लिए आत्ममंथन का विषय है।
हम बीकानेर जाना तो स्वीकार कर लेते हैं,
लेकिन अपने ही अस्पताल में स्थायी महिला डॉक्टर की मांग करने में चुप क्यों हो जाते हैं?

यह राजनीति का विषय नहीं है।
यह हमारी माताओं, बहनों और आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा का विषय है।

और अगर आपको लगता है यह पोस्ट किसी पार्टी के पक्ष में है या किसी के विपक्ष में तो आप *#&*€$¢√π§। 

धन्यवाद
✍️ Kalu Nath

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