हर अपराध निंदनीय होता है, लेकिन क्या अपराध करने वाले लोगों को यह पता नहीं होता या फिर वो लोग बदले की भवना, गुस्से में और कुछ चीजों के बदले में यह अपराध करते हैं।
शांति प्रिय लोग जब इन घटनाओं पर अपनी यह टिप्पणी करते हैं कि “यह अपराध निंदनीय है” तो उनको हमेशा याद रखना चाहिए कि अपराधी हमेशा हमारा पड़ोसी, जानकर या हमारे समाज का ही कोई शख्स होता है।
इनको अगर सरल भाषा में असमाजिक तत्व कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। हमारे समाज की परवरिश में ही सबसे बड़ी खामी नजर आती है, जिसके चलते एक आम नागरिक अपराधी बन जाता है और वो अपराध कर बैठता है।
अपराध का शिकार होने वाला न्याय की मांग करता है जो हरेक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार भी है, उसको न्याय मिलना ही चाहिए। लेकिन बहुत सारी घटनाओं में अपराधी का सम्बंध किसी बड़े आदमी (नेता) से होता ही है, जिसके सहारे वो उस सजा से छूट जाता है या उसकी सजा कम हो जाती है जो हमारा समाज बिल्कुल नहीं चाहता।
यह लेख मैंने फेसबुक पर लिखा था, एक स्थानीय घटना के बाद. 8 नवम्बर 2020
